पुष्य नक्षत्र दोष शांति

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पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में से एक माना जाता है जो पवित्र और शुभ है। यह नक्षत्र मुख्यतः कर्क राशि में आता है और इसका स्वामी शनि है। पुष्य नक्षत्र का अर्थ है “समृद्धि”। इस नक्षत्र की पूजा, जप और कार्य विशेष फलदायी होते हैं। पुष्य नाम का अर्थ ही “शक्ति” या “पोषण” है। यह नक्षत्र समृद्धि, ख़ुशी और आनंद का प्रतिनिधित्व करता है। हालाँकि, कुछ स्थितियों में पुष्य नक्षत्र कुछ दोषों का कारण भी बन सकता है।

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Description

पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों को कुछ दोषों या समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पुष्य नक्षत्र के दोष या प्रभाव इस प्रकार हो सकते हैं:

 

  1. **स्वास्थ्य समस्याएं**: इस नक्षत्र के तहत पैदा हुए व्यक्तियों को स्वास्थ्य समस्याओं, विशेष रूप से पाचन समस्याओं का अनुभव हो सकता है।
  2. **वित्तीय समस्याएँ**: वित्तीय संकट या वित्तीय स्थिरता की कमी हो सकती है।
  3. **पारिवारिक तनाव**: घर में पारिवारिक तनाव और वाद-विवाद हो सकता है।
  4. **भावनात्मक अस्थिरता**: भावनात्मक अस्थिरता और कम मनोबल हो सकता है।
  5. चिड़चिड़ापन: स्वभाव चिड़चिड़ा हो सकता है, पूजा स्वभाव को शांत कर सकती है
  6. विवाह : विवाह संबंधी परेशानियां कम होती हैं और विवाह तय हो जाते हैं
  7. बिजनेस: इसमें बिजनेस खूब अच्छा आगे जाता है
  8. नौकरी : नौकरी की परेशानियां कम होती हैं

 

पुष्य नक्षत्र दोष का उपाय

 

##### 1. पूजा और जप

 

  1. **बृहस्पति और शनि की पूजा**: पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है, इसलिए शनि की पूजा करनी चाहिए। साथ ही गुरु की पूजा करनी चाहिए क्योंकि गुरु ज्ञान और बुद्धि का कारक होता है।
  2. **गुरुवार और शनिवार**: गुरुवार और शनिवार को विशेष पूजा और व्रत रखना चाहिए।

 

  1. जप

 

  1. **शनि मंत्र**: “ओम शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।
  2. **गुरु मंत्र**: “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” मंत्र का जाप करें।

 

 

  1. **नीलम रत्न**: शनि की शांति के लिए नीलम रत्न धारण करना चाहिए।
  2. **पुखराज रत्न**: गुरु की शांति के लिए पुखराज रत्न धारण करना चाहिए।

 

  1. दान

 

  1. **शनि का दान**: शनिवार के दिन काला कपड़ा, काले तिल और लोहे का दान करना चाहिए।
  2. **गुरु दान**: गुरुवार के दिन पीले वस्त्र, चने की दाल और पीले फल का दान करना चाहिए।

 

  1. उपवास

 

  1. **गुरुवार व्रत**: गुरुवार का व्रत करें और गुरु की पूजा करें।
  2. **शनिवार का व्रत**: शनिवार का व्रत करें और शनि की पूजा करें।

 

पुष्य नक्षत्र शांति पूजा के लिए उचित समय एवं स्थान

 

  1. **कब**: पूजा शुभ मुहूर्त, विशेष नक्षत्र वाले दिन और विशेष शुभ दिन पर की जानी चाहिए।
  2. **कहां**: घर के किसी पवित्र स्थान, मंदिर, विशेषकर त्र्यंबकेश्वर या तीर्थस्थान पर पूजा करना उचित है।

 

पुष्य नक्षत्र शांति पूजा की लागत क्या है?

पुष्य नक्षत्र शांति पूजा की लागत विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है:

आम तौर पर पूजा का खर्च रु. 7500 से रु. 15000 तक हो सकता है,

सटीक पूजा लागत के लिए हमारे ज्योतिषियों से संपर्क करें

 

 

क्या मुझे पुष्य नक्षत्र शांति पूजा में शामिल होना चाहिए?

हाँ, यदि संभव हो तो उपस्थित रहना चाहिए।

 

मैं पुष्य नक्षत्र शांति पूजा ऑनलाइन कर सकता हू

अगर किसी कारण से पूजा में आना संभव नहीं है तो हम ऑनलाइन पूजा कर सकते हैं

 

पुष्य नक्षत्र शांति पूजा में कितना समय लगता है?

इस पूजा में तीन घंटे का समय लगता है

 

पुष्य नक्षत्र शांति पूजा के लिए टिप्स

 

  1. **सही पंडित का चयन**: एक उपयुक्त और अनुभवी पंडित के मार्गदर्शन में पूजा करना।
  2. **पवित्रता और पवित्रता**: पूजा के दौरान पवित्रता और पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए।
  3. **मन की शांति और भक्ति**: पूजा के दौरान मन की शांति और भक्ति होनी चाहिए।

 

पुष्य नक्षत्र पूजा अनुष्ठान

 

पूजा साहित्य

 

  1. किसी देवता की मूर्ति या फोटो
  2. पवित्र जल (गंगा जल)
  3. हल्दी, कुंकु, अक्षत
  4. फूल, माला, धूप, दीप
  5. नैवेद्य (फल, मिठाई)
  6. पान का पत्ता, सुपारी
  7. चावल
  8. घी का दीपक
  9. तांबे का कलश
  10. आम के पत्ते
  11. नारियल

 

पूजा अनुष्ठान

 

  1. **संकल्प**: पवित्र जल लेकर संकल्प करना चाहिए।
  2. **आवाहन**: पूजा की शुरुआत देवताओं के आवाहन से करनी चाहिए।
  3. **अभिषेक**: पवित्र जल, दूध, दही, घी, शहद और चीनी से मूर्ति का अभिषेक करें।
  4. **पूजन**: हल्दी, कुंकू, अक्षत लगाना चाहिए। ताजे फूलों की माला चढ़ानी चाहिए। देवी-देवताओं की धूप-दीप अर्पित करके आरती करनी चाहिए।
  5. **नैवेद्य**: देवताओं को फल और मिठाई अर्पित करनी चाहिए।
  6. **मंत्र जप**: उपरोक्त मंत्रों का जाप करना चाहिए।

 

 

### निष्कर्ष

 

पुष्य नक्षत्र अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इस नक्षत्र की उचित पूजा, जप और व्रत से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख, समृद्धि और शांति आती है। यदि पुष्य नक्षत्र का दोष ठीक से और विश्वास के साथ दूर किया जाए तो सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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