वद्य चतुर्दशी शांति

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वद्य चतुर्दशी शांति पूजा हिंदू धर्म में एक विशेष पूजा है “वद्य” का अर्थ है क्षय या गिरावट और “चतुर्दशी” का अर्थ है 14 वां दिन। यह दिन विशेष रूप से शिव उपासना के लिए माना जाता है और इसके माध्यम से भक्त भगवान शिव की पूजा करके उनकी कृपा प्राप्त करते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं और हमें दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करते हैं।

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Description

वद्य चतुर्दशी शांति पूजा के विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व हैं:

 

  1. **नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना:** यह पूजा घर से नकारात्मक ऊर्जा और कठिनाइयों को दूर करती है।
  2. **शांति और स्थिरता:** पूजा करने से घर में शांति और स्थिरता आती है।
  3. **आध्यात्मिक उत्थान:** भक्तों के आध्यात्मिक उत्थान के लिए यह पूजा बहुत फलदायी है।
  4. **स्वास्थ्य में सुधार:** यह पूजा स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने में उपयोगी है।
  5. **भगवान शिव की कृपा:** भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिएयह पूजा थी और उनके आशीर्वाद के लिए की जाती है।
  6. विवाह *** यह पूजा विवाह की प्राप्ति के लिए की जाती है
  7. व्यापार** यह पूजा व्यापार में सफलता और लाभ पाने के लिए की जाती है

 

### वद्य चतुर्दशी शांति पूजा कब की जाती है?

विशेष मुहूर्त: आप किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेकर शुभ मुहूर्त का निर्धारण कर सकते हैं।

 

वद्य चतुर्दशी शांति पूजा की लागत क्या है?

वद्य चतुर्दशी शांति पूजा की लागत विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है:

आम तौर पर पूजा का खर्च रु. 7500 से रु. 25000 तक हो सकता है,

सटीक पूजा लागत के लिए हमारे ज्योतिषियों से संपर्क करें

 

 

क्या मुझे वद्य चतुर्दशी पर शांति पूजा में उपस्थित रहना  जरूरी है ?

हाँ, यदि संभव हो तो उपस्थित रहना चाहिए।

 

क्या मैं वद्य चतुर्दशी शांति पूजा ऑनलाइन कर सकता हूँ?

अगर किसी कारण से पूजा में आना संभव नहीं है तो हम ऑनलाइन पूजा कर सकते हैं

 

इस वद्य चतुर्दशी शांति पूजा में कितना समय लगता है?

इस पूजा में तीन घंटे का समय लगता है

 

### वद्य चतुर्दशी शांति पूजा कहाँ की जाती है?

 

वद्य चतुर्दशी शांति पूजा आमतौर पर घर, मंदिर या धार्मिक स्थानों पर की जाती है। जहां कोई तीर्थ क्षेत्र [त्र्यंबकेश्वर] हो, वहां यह पूजा विशेष रूप से प्रभावी मानी जाती है।

 

वद्य चतुर्दशी शांति पूजा कब की जाती है:**

 

* **मंगलवार, बुधवार या शनिवार:** वद्य चतुर्दशी शांति पूजा मंगलवार, बुधवार या शनिवार को करना शुभ माना जाता है।

* **अमावस्या या पूर्णिमा:** यमल शांति पूजा अमावस्या या पूर्णिमा तिथियों पर भी की जा सकती है।

* **विशेष मुहूर्त:** शुभ मुहूर्त निर्धारित करने के लिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लें

 

 

वद्य चतुर्दशी शान्ति

 

### वद्य चतुर्दशी शांति पूजा अनुष्ठान

 

वद्य चतुर्दशी शांति पूजा का अनुष्ठान इस प्रकार है:

 

  1. **स्थान की शुद्धि:** पूजा स्थल को शुद्ध किया जाता है। उस स्थान को गंगा जल या शुद्ध जल से शुद्ध किया जाता है।
  2. **मंत्र जप:** पूजा के दौरान विभिन्न मंत्रों और भजनों का जाप किया जाता है। विशेषकर “महामृत्युंजय मंत्र” का जाप किया जाता है।
  3. **पंचामृत स्नान:** भगवान की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराया जाता है। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और चीनी होती है।
  4. **अभिषेक:** भगवान की मूर्ति का जल से अभिषेक किया जाता है। इस अभिषेक में पवित्र नदियों, जल का उपयोग किया जाता है।
  5. **अर्चना:** भगवान की मूर्ति पर विभिन्न फूल, बेलपत्र, धूप, दीप, नैवेद्य आदि चढ़ाए जाते हैं।
  6. **हवन:** पूजा का एक अहम हिस्सा है हवन। हवन के समय शुद्ध घी का प्रयोग कर मंत्रोच्चारण किया जाता है।
  7. **प्रसाद:** पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद वितरित किया जाता है। प्रसाद में आमतौर पर फल, मिठाई, पंचामृत आदि शामिल होते हैं।

 

 

### वद्य चतुर्दशी शांति पूजा के लाभ

 

  1. **नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है:** घर में नकारात्मक ऊर्जा और कठिनाइयों को दूर करता है।
  2. **शांति और स्थिरता:** घर में शांति, स्थिरता और खुशी लाता है।
  3. **स्वास्थ्य में सुधार:** स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
  4. **आध्यात्मिक उत्थान:** यह पूजा भक्तों के आध्यात्मिक उत्थान के लिए फलदायी है।
  5. **भगवान शिव की कृपा:** भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और उनके आशीर्वाद से सभी कार्य सफल होते हैं।

 

### निष्कर्ष

 

वद्य चतुर्दशी शांति पूजा हिंदू धर्म में एक बहुत ही महत्वपूर्ण पूजा है जो भगवान शिव की कृपा से घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और शांति, समृद्धि और खुशी प्राप्त करने के लिए की जाती है। यदि इस पूजा का आयोजन सही ढंग से किया जाए और इसका पालन किया जाए तो घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। पूजा का शुभ समय तय करना और पूरे विधि-विधान से पूजा करना बहुत जरूरी है। इसलिए विद्या चतुर्दशी के दिन किसी ज्योतिषी की सलाह लेकर शांति पूजा करनी चाहिए।

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