केतू शांति

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केतु एक छाया ग्रह है और ज्योतिष में इसे अशुभ ग्रह माना जाता है। केतु के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में विभिन्न दोष और कठिनाइयाँ आ सकती हैं। केतु दोष स्वास्थ्य समस्याओं, वित्तीय नुकसान, मानसिक तनाव और कई अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

जो राहु का विपरीत छाया ग्रह माना जाता है। केतु को चंद्रमा की कक्षा में राहु के विपरीत अंश माना जाता है। राहु और केतु ग्रह नहीं बल्कि छाया ग्रह हैं, जिन्हें ‘अर्धग्रह’ या ‘छाया ग्रह’ कहा जाता है। ये ग्रह हमारे जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाते हैं

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Description

केतु ग्रह की विशेषताएं

  • स्वभाव: केतु को आध्यात्मिक ग्रह माना जाता है। यह आत्मा, मोक्ष और आध्यात्मिक प्रगति का प्रतीक है।
  • राशि स्थिति: केतु की उच्च राशि वृश्चिक और नीच राशि वृषभ है।
  • दिशा: केतु को दक्षिण दिशा का स्वामी माना जाता है।
  • रंग : केतु का रंग भूरा, स्लेटी या धुएँ के रंग का माना गया है।
  • राशि स्वामित्व: मीन राशि का स्वामी केतु है।
  • अंक: केतु का अंक 7 माना जाता है।
  • केतु ग्रह का प्रभाव
  • केतु का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में विभिन्न प्रकार से देखा जा सकता है। ये प्रभाव शुभ या अशुभ हो सकते हैं।

 

शुभ प्रभाव:

  • आध्यात्मिकता: केतु आध्यात्मिक प्रगति को प्रोत्साहित करता है। वह व्यक्ति को ध्यान, साधना और मोक्ष के मार्ग पर प्रेरित करते हैं।
  • ज्ञान: केतु ज्ञान, रहस्यवाद, तंत्र और ज्योतिष में रुचि बढ़ाता है।
  • मनोवृत्ति में परिवर्तन: केतु व्यक्ति को सांसारिक जीवन से विमुख कर वैराग्य और वैराग्य की राह पर ले जाता है।

 

प्रतिकूल प्रभाव:

  • मानसिक अस्थिरता: केतु मानसिक तनाव, चिंता और बेचैनी का कारण बन सकता है।
  • स्वास्थ्य समस्याएं: केतु त्वचा रोग, अनिद्रा, मानसिक विकार और अन्य शारीरिक समस्याएं पैदा कर सकता है।
  • अस्पष्टता: केतु व्यक्ति के जीवन में अस्पष्टता, भ्रम और उलझन पैदा कर सकता है।

 

केतु दोष का प्रभाव

  1. **स्वास्थ्य समस्याएं**: मानसिक तनाव, त्वचा रोग, अनिद्रा और अन्य शारीरिक समस्याएं।
  2. **वित्तीय हानि**: वित्तीय स्थिति में अस्थिरता, हानि और अप्रत्याशित खर्च।
  3. **वैवाहिक तनाव**: विवाह में तनाव, बहस और रिश्ते का टूटना।
  4. **व्यापारिक कठिनाइयाँ**: कार्य में बाधा, व्यापार में हानि, प्रगति में कठिनाइयां।
  5. **मानसिक अस्थिरता**: चिंता, अवसाद और मानसिक अस्थिरता।

 

### केतु शांति उपाय

  1. **केतु की पूजा**: केतु की विधिवत पूजा।
  2. **गणपति पूजा**: भगवान गणपति की पूजा करें और “ओम गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
  3. **हनुमानजी पूजा**: हनुमान चालीसा का जाप और हनुमानजी की पूजा करें।
  4. **महामृत्युंजय मंत्र जप**: “ओम त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम | उर्वारुकमिव बंधनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात ||” इस मंत्र का जाप करें.
  5. **दान**: जरूरतमंद लोगों को दान देना। विशेषकर काले तिल, काले वस्त्र, लोहा, सरसों का तेल का दान करना चाहिए।
  6. **रुद्राभिषेक**: शिवलिंग पर विभिन्न पवित्र वस्तुओं का अभिषेक करना ही रुद्राभिषेक है।

 

 केतु शांति पूजा कब और कहाँ करें?

  1. **कब**: शुभ समय, अमावस्या, पूर्णिमा, विशेष योग, नक्षत्र और केतु ग्रह के प्रभाव में पूजा करनी चाहिए।
  2. **कहां**: घर के किसी पवित्र स्थान, स्थानीय मंदिर, विशेषकर त्र्यंबकेश्वर, किसी तीर्थ स्थल या शिव मंदिर में पूजा करना उपयुक्त है।

 

 केतु शांति शांति पूजा की लागत क्या है?

  •  केतु शांति पूजा की लागत विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है:
  • आम तौर पर केतु शांति  पूजा का खर्च रु. 7500 से रु. 15000 तक हो सकता है,
  • सटीक पूजा लागत के लिए हमारे ज्योतिषियों से संपर्क करें

 

 

क्या मुझे केतु शांति पूजा में शामिल होना चाहिए?

हाँ, यदि संभव हो तो उपस्थित रहना चाहिए।

 

क्या मैं केतु शांति पूजा ऑनलाइन कर सकता हूँ?

अगर किसी कारण से पूजा में आना संभव नहीं है तो हम ऑनलाइन पूजा कर सकते हैं

 

इस केतु शांति पूजा में कितना समय लगता है?

इस पूजा में तीन घंटे का समय लगता है

 

केतु शांति पूजा की विधि

  • केतु शांति: केतु शांति पूजा शुरू करते समय स्नान करें और सफेद कपड़े पहनें
  • संकल्प: पूजा के लिए बैठते समय संकल्प करना चाहिए
  • इष्टदेव का स्मरण : इष्टदेव कुलस्वामिनी का स्मरण करना चाहिए
  • गणपति पूजा: गणेश पूजा करनी चाहिए और मनोकामना करनी चाहिए
  • कलश पूजा: वरुण देवता का आवाहन करें
  • कुलस्वामिनी पूजा: मातृका की पूजा करनी चाहिए
  • प्रधान पूजा: केतु का आवाहन करना चाहिए
  • अभिषेक : शुद्ध जल से पंचामृत पूजन, महाअभिषेक करना चाहिए
  • नवग्रह पूजा : नवग्रह भगवान को प्रसन्न करने के लिए नवग्रह पूजा करनी चाहिए
  • रुद्र पूजा: भगवान महादेव की पूजा करनी चाहिए
  • यज्ञ : शुद्ध अग्नि जलानी चाहिए
  • आहुति: यज्ञ में शुद्ध घी, हवन सामग्री डालें
  • पूर्णाहुति: यज्ञ पूर्ण करें
  • आशीर्वाद: गुरुजी को नमस्कार करें और गुरुजी का आशीर्वाद लें

 

पूजा का लाभ

 

  1. **मुश्किलें दूर होना**: जीवन में कठिनाइयाँ और परेशानियाँ कम हो जाती हैं।
  2. **दाम्पत्य जीवन में सुख**: दाम्पत्य जीवन में सुख और संतोष बढ़ता है।
  3. **स्वास्थ्य सुधार**: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
  4. **आर्थिक स्थिरता**: आर्थिक स्थिति स्थिर होती है और नए अवसर खुलते हैं।
  5. **मानसिक शांति**: मानसिक तनाव कम होने से शांति और स्थिरता प्राप्त होती है।
  6. **व्यावसायिक प्रगति**: व्यावसायिक जीवन प्रगति और सफलता लाता है।
  7. **पारिवारिक सौहार्द**: पारिवारिक रिश्तों में सुधार होता है और खुशहाल माहौल बनता है।

 

केतु दोष के प्रभाव से छुटकारा पाने के लिए नियमित पूजा, मंत्र जाप, दान और अन्य उपाय बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये सभी उपाय और पूजा किसी उपयुक्त पंडित या ज्योतिषी के मार्गदर्शन में ही की जानी चाहिए

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