अतिगण्ड योग दोष शांति पूजा

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अतिगंड योग को ज्योतिष शास्त्र में एक अशुभ योग माना जाता है। अतिगंड योग में अति का अर्थ है बहुत और गंड का अर्थ है कष्ट या कठिनाई। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में कठिनाइयां, बाधाएं और संकट बढ़ सकते हैं।

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Description

अतिगण्ड योग के दुष्प्रभाव

 

  1. **वैवाहिक कठिनाइयाँ**: यह योग वैवाहिक जीवन में तनाव, वाद-विवाद और मतभेद पैदा कर सकता है।
  2. **व्यावसायिक कठिनाइयाँ**: कार्य या व्यवसाय में बाधाएँ आ सकती हैं, प्रगति धीमी हो सकती है।
  3. **स्वास्थ्य समस्याएं**: शारीरिक स्वास्थ्य, दुर्घटना या पुरानी बीमारियों से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
  4. **वित्तीय हानि**: वित्तीय स्थिति अस्थिर हो सकती है, अप्रत्याशित खर्च और नुकसान हो सकता है।
  5. **मानसिक तनाव**: मानसिक अस्थिरता, चिंता और तनाव बढ़ सकता है।

 

अतिगण्ड योग के लक्षण:

ज्ञान और सीखने में कठिनाइयाँ: अतिगंड योग वाले व्यक्ति को सीखने में कठिनाइयाँ हो सकती हैं। उन्हें ध्यान केंद्रित करने और पढ़ाई में संलग्न होने में कठिनाई हो सकती है।

व्यवसायिक कठिनाइयाँ: इस योग के कारण व्यवसाय में कठिनाइयाँ, आर्थिक हानि और नौकरी छूटने का खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य समस्याएं: इस योग से पेट दर्द, त्वचा विकार, नेत्र रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

रिश्ते में परेशानी: यह योग वैवाहिक जीवन और परिवार के सदस्यों के साथ रिश्ते में परेशानी पैदा कर सकता है।

 

अतिगण्ड योग के परिणाम:

अतिगण्ड योग का फल कुंडली में ग्रहों की स्थिति तथा अन्य योगों पर निर्भर करता है। कुछ राशियों पर इस योग का प्रभाव अधिक तीव्र हो सकता है

 

अतिगण्ड योग उपाय के उपाय

 

  1. **गणपति की पूजा**: गणपति की विधिपूर्वक पूजा करें और “ओम गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
  2. **हनुमानजी की पूजा**: हनुमान चालीसा का पाठ करें और “ओम हं हनुमते नमः” मंत्र का जाप करें।
  3. **श्री सूक्तम पाठ**: श्री सूक्तम का पाठ करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
  4. **दुर्गा सप्तशती पाठ**: दुर्गा सप्तशती का पाठ।
  5. **महामृत्युंजय मंत्र जप**: “ओम त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिम् पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बंधनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||” इस महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें।

 

अतिगंड योग पूजा कब और कहाँ करें

 

  1. **कब**: विशेष मुहूर्त, गुरुपुष्य योग या रविपुष्य योग, अमावस्या या पूर्णिमा, इन शुभ तिथियों और नक्षत्रों पर पूजा की जानी चाहिए।
  2. **कहाँ**: कोई यह पूजा घर के गर्भगृह, स्थानीय मंदिर, तीर्थ स्थल, त्र्यंबकेश्वर या इसी तरह के तीर्थ क्षेत्र में कर सकता है।

 

अतिगण्ड योग पूजा की विधि

 

  1. **सामग्री तैयार करना**:

– भगवान गणेश की मूर्ति

– फूल, धूप, दीप, प्रसाद (फल)

– चावल, कुंकू, हल्दी, पंचफले

– तांबे का कलश, पवित्र जल, पत्ता, सुपारी

 

  1. **पूजा की क्रमबद्ध प्रक्रिया**:

– **संकल्प**: पूजा करने का संकल्प लें।

– **कलश स्थापना**: तांबे के कलश में पवित्र जल भरकर उस पर नारियल रखें।

– **गणपति पूजन**: भगवान गणेश का आवाहन करके उनकी पूजा करें।

– **मंत्र जप**: “ओम गण गणपत्ये नमः”, “ओम हं हनुमते नमः”, “ओम त्र्यंबकं यजामहे” मंत्रों का जाप करें।

– **नैवेद्य अर्पण**: गणपतिजी को पांच फल चढ़ाएं।

 

अतिगंड शांति पूजा की लागत कितनी है?

अतिगंड शांति पूजा की लागत विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है:

आम तौर पर, अतिगंड शांति पूजा की लागत रु 7500 से रु. 15000 तक हो सकता है,

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पूजा का लाभ

 

  1. **मुश्किलें दूर होना**: जीवन में कठिनाइयाँ और परेशानियाँ कम हो जाती हैं।
  2. **दाम्पत्य जीवन में सुख**: दाम्पत्य जीवन में सुख और संतोष बढ़ता है।
  3. **स्वास्थ्य सुधार**: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
  4. **आर्थिक स्थिरता**: आर्थिक स्थिति स्थिर होती है और नए अवसर खुलते हैं।
  5. **मानसिक शांति**: मानसिक तनाव कम होने से शांति और स्थिरता प्राप्त होती है।
  6. **व्यावसायिक प्रगति**: व्यावसायिक जीवन प्रगति और सफलता लाता है।

 

अतिगंड योग के प्रभाव से छुटकारा पाने के लिए नियमित पूजा, जप और दान बहुत जरूरी है। ये सभी उपाय और पूजा किसी उपयुक्त पंडित या ज्योतिषी के मार्गदर्शन में ही की जानी चाहिए।

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